
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
1970 के दशक से भी बड़ा खतरा
IEA के अनुसार, मौजूदा हालात 1970 के दशक के तेल संकट से भी अधिक गंभीर साबित हो सकते हैं। उस समय वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई थी, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ जाएगा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ईरान-इजरायल तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली है।
- सप्लाई बाधित होने की आशंका से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं
- आयात पर निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति खासतौर पर चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट
इस वैश्विक संकट का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है।
- रुपया गिरकर 93.94 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया
- इससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका है
भारत पर संभावित असर
विशेषज्ञों के अनुसार:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं
- आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा
- व्यापार और उद्योग पर भी असर पड़ सकता है


